इस पोस्ट में कैलाश सत्यार्थी (Kailash Satyarthi) का जीवन परिचय और उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को सम्मिलित किया गया है। हर एक बच्चे को कैलाश सत्यार्थी के बारे में जरूर जाना चाहिए क्योंकि कैलाश सत्यार्थी वही व्यक्ति है जिन्होंने बच्चों के बचपन को बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान दिया।

Table of Contents

कैलाश सत्यार्थी । Kailash Satyarthi

कैलाश सत्यार्थी संक्षिप्त जानकारी

जन्म 11 जनवरी 1954
जन्म स्थानविदिशा, मध्यप्रदेश, भारत
असली नाम कैलाश शर्मा
पूरा नामकैलाश सत्यार्थी
पिता का नामरामप्रसाद शर्मा
माता का नामनामचिरोंजी
पत्नी का नामसुमेधा
उम्र68 साल
प्रसिद्धिबच्चों के अधिकार के लिए आन्दोलन
शिक्षासम्राट अशोक प्रौद्योगिकी संस्थान
धार्मिक मान्यताहिंदू
पुरस्कारनोबेल शान्ति पुरस्कार,लोकतंत्र के रक्षक पुरस्कार, अल्फोंसो कोमिन अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार, अल्फोंसो कोमिन अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार, इतालवी सीनेट का पदक, रोबर्ट एफ कैनेडी मानवाधिकार पुरस्कार
वेबसाइट kailashsatyarthi.net

कैलाश सत्यार्थी का जन्म

कैलाश सत्यार्थी (Kailash Satyarthi) का जन्म 11 जनवरी को 1954 को मध्यप्रदेश के विदिशा में हुआ। इनके बचपन का नाम कैलाश शर्मा था, जिसे उन्होंने आगे चलकर सत्यार्थी कर लिया। इनके पिता का नाम रामप्रशाद शर्मा, माता का नाम चिरोंजी और पत्नी का नाम सुमेधा था। वे बचपन से ही बड़े दयालु किस्म के इंसान हैं. बचपन में ही उन्होंने देखा की कैसे दुसरे गरीब बच्चे उनकी तरह पढाई करने के लिए स्कूल नहीं जा पाते थे और बड़े ही कठोर अवस्था में पैसे कमाने के लिए काम किया करते हैं.

कैलाश सत्यार्थी (Kailash Satyarthi) की शिक्षा 

इन्होंने विदिशा (मध्यप्रदेश) से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद यहीं से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के साथ हाई-वोल्टेज इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की। अपनी शिक्षा पूरी कर लेने के बाद इन्होंने कुछ समय तक एक काॅलेज में शिक्षक के रूप में सेवाएं भी दी लेकिन इस कार्य में उनका मन ज्यादा दिन तक नहीं लगा। NCERT NOTES

कैलाश सत्यार्थी (Kailash Satyarthi) का करियर

कैलाश सत्यार्थी (Kailash Satyarthi) पेशे से वैद्युत इंजीनियर हैं लेकिन उन्होने 26 वर्ष की उम्र में ही 1980 में अपना इलेक्ट्रिक इंजीनियर के करियर को छोड़कर 1983 में बालश्रम के ख़िलाफ़ ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ की स्थापना की। इस समय वे ‘ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर’ (बाल श्रम के ख़िलाफ़ वैश्विक अभियान) के अध्यक्ष भी हैं। Daily current Affairs

कैलाश सत्यार्थी (Kailash Satyarthi)के पुरस्कार 

कैलाश सत्यार्थी (Kailash Satyarthi) को बच्चों की दुनिया को बेहतर और कुशल बनाने के लिए पूरी दुनिया में कई सम्मान और पुरस्कार से सम्मनत  किया गया हैं। विभिन देशों के भिन्न भिन्न पुरस्कार से उन्हें नवाजा जा चुका है जिसमें प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कर तक शामिल है। कैलाश सत्यार्थी को जिन पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है वह नीचे दिए गए हैं – 

1993अशोक फेलो चुने गये। (अमेरिका)
1994द आचनेर अन्तर्राष्ट्रीय शांति पुरस्कार (जर्मनी)
1995ट्रम्पेटर पुरस्कार (अमेरिका)
1995रॉबर्ट एफ केनेडी मानव अधिकार पुरस्कार (अमेरिका)
1998गोल्डेन फ्लैग पुरस्कार (नीदरलैण्ड्स)
1999ला हॉस्पिटल अवार्ड (स्पेन)
1999फ्रे​डरिक ईबर्ट स्टिफटंग अवार्ड (जर्मनी)
2002वालेनबर्ग मेडल (मिशिगन विश्वविद्यालय द्वारा प्रदत्त)
2006फ्रीडम पुरस्कार (US)
2007अमेरिका के स्टेट विभाग द्वारा ‘आधुनिक दासता को समाप्त करने के लिये कार्यरत नायक’ का सम्मान
2007इटली के सिनेट का स्वर्ण पदक
2008अल्फांसो कोमिन अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार (स्पेन)
2009डिफेण्डर्स ऑफ डेमोक्रैसी पुरस्कार (अमेरिका)
2014नोबेल शांति पुरस्कार
2015हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित पुरस्कार “ह्युमेनीटेरियन पुरस्कार ” से सम्मानित

कैलाश सत्यार्थी नॉबेल शांति पुरस्कार

कैलाश सत्यार्थी, मलाला यूसुफजई के साथ, 2014 में “बच्चों और युवाओं के दमन के खिलाफ उनके संघर्ष और सभी बच्चों के शिक्षा के अधिकार के लिए” नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त किया। Important gk question

कैलाश सत्यार्थी के अनमोल वचन

बचपन का मतलब होता है सादगी। इस दुनिया को बच्चों की नज़र से देखो- ये बहुत खूबसूरत है। 

मेरे लिए, शांति हर बच्चे का एक मौलिक मानवाधिकार है, यह अनिवार्य है और दिव्य है।

चलिए, हम हमारे बच्चों के प्रति करुणा के माध्यम से दुनिया को एकजुट करते हैं। 

हर एक मिनट मायने रखता है, हर एक छोटा बच्चा मायने रखता है, हर एक बचपन मायने रखता है। 

मैं मंदिरों में कभी नहीं जाता, लेकिन जब मैं एक बच्चे को देखता हूँ, मुझे उसमें भगवान दिखाई देते हैं और मैं उन्हीं में भगवान का दर्शन करता हूँ। 

मैं शोषण से शिक्षा की ओर, और गरीबी से साझा समृद्धि की ओर प्रगति करने के लिए कहता हूँ, एक ऐसी प्रगति जो गुलामी से आज़ादी की ओर हो, एक ऐसी प्रगति जो हिंसा से शांति की ओर हो। 

मेरे जीवन का एकमात्र उद्देश्य यह है कि हर बच्चा:

एक बच्चा होने के लिए आज़ाद हो,

आगे बढ़ने और खुद का विकास करने के लिए आज़ाद हो,

खाने, सोने, और दिन के उजाले को देखने के लिए आज़ाद हो,

हंसने और रोने के लिए आज़ाद हो,

खेलने के लिए आज़ाद हो,

सीखने, स्कूल जाने और सबसे ऊंचा सपने देखने के लिए आज़ाद हो। 

मैं एक ऐसी दुनिया का सपना देखता हूँ जहाँ बाल श्रम ना हो, एक ऐसी दुनिया जिसमे हर बच्चा स्कूल जाता हो। एक ऐसी दुनिया जहाँ हर बच्चे को उसका मौलिक अधिकार मिले।

बच्चों को सपने देखने से वंचित करने से बढ़कर कोई अपराध नहीं है।

हर एक मिनट मायने रखता है, हर एक छोटा बच्चा मायने रखता है, हर एक बचपन मायने रखता है।

दोस्तों, आज मानवता के दरवाजे पर दस्तक देने वाला सबसे बड़ा संकट-असहिष्णुता है।

चलिए अन्धकार से प्रकाश की ओर बढें। चलिए मृत्यु से देवत्व की ओर बढें। चलिए हम आगे बढें।

कैलाश सत्यार्थी की सोच

कैलाश सत्यार्थी (Kailash Satyarthi) ने बच्चों से काम लेने को मानव अधिकारों से जोड़ा और इसका विरूद्ध खड़े हुए। वे इसे बच्चों के साथ होने वाले वैश्विक शोषण का सबसे बड़ा रूप मानते थे. वे यह भी कहते थे कि इसकी वजह से ही दुनिया में गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी और जनसंख्या वृद्धि जैसे मुद्दे आज मानवता के सामने एक बड़ी चुनौती बन रहे हैं। सत्यार्थी 1980 से बाल दासता और शोषण को समाप्त करने के लिए वैश्विक आंदोलन में सबसे आगे रहे हैं । उन्होंने बाल श्रम के खिलाफ अपने आंदोलन के अपने प्रयासों को एजूकेशन फाॅर ऑल दर्शन से जोड़ने का प्रयास भी किया है।

कैलाश सत्यार्थी के द्वारा किये गये कार्य 

बचपन बचाओ आन्दोलन 

बचपन बचाओ आंदोलन भारत में एक ऐसा आन्दोलन हैं जो बच्चो के हित और अधिकारों के लिए कार्य करता हैं। वर्ष 1980 में “बचपन बचाओ आंदोलन” की शुरुआत कैलाश सत्यार्थी (Kailash Satyarthi) ने की थी जो अब तक 80 हजार से अधिक मासूमों के जीवन को तबाह होने से बचा चुके हैं। बाल मजदूरी कुप्रथा भारत में सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है। कैलाश सत्यार्थी ने इन बच्चों को इस अभिशाप से मुक्ति दिलाना ही अपनी जिंदगी का मकसद समझ लिया।

“बचपन बचाओ आंदोलन” आज भारत के 15 प्रदेशों के 200 से अधिक जिलों में सक्रिय है। इसमें लगभग 70000 स्वयंसेवक हैं जो लगातार मासूमों के जीवन में खुशियों के रंग भरने के लिए कार्यरत हैं। एक आकलन के मुताबिक साल 2013 में मानव तस्करी के 1199 मुकदमें दर्ज हुए थे जिनमें से 10 प्रतिशत मामले “बचपन बचाओ आंदोलन” के प्रयासों से दर्ज किए गए थे। इस आंदोलन में कैलाश के दो साथी शहीद हो चुके हैं।

बचपन बचाओ आंदोलन सामान्य तरीके से भी बच्चों को मुक्त कराते हैं और छापेमारी द्वारा भी। यह संस्था बच्चों को कानूनी प्रक्रिया द्वारा छुड़ाती है और उन्हें पुनर्वास भी दिलाती हैं। इसके साथ ही दोषियों को सजा भी दिलाती हैं। जिन बच्चों के माता पिता नहीं होते उन्हें इस संस्था द्वारा चलाए जाने वाले आश्रम में भेज दिया जाता है। कैलाश सत्यार्थी का मानना है कि किसी भी देश में बाल मज़दूरी के प्रमुख कारण गरीबी, अशिक्षा, सरकारी उदासीनता और क्षेत्रीय असंतुलन है। 

कैलाश सत्यार्थी ने ना केवल बच्चों को मुक्त कराया बल्कि बाल मज़दूरी को खत्म करने के लिए मज़बूत कानून बनाने की भी ज़ोरदार मांग की। 1998 में 103 देशों से गुज़रने वाली ‘बाल श्रम विरोधी विश्व यात्रा’ का आयोजन और नेतृत्व भी कैलाश ने किया।

कैलाश सत्यार्थी के अनुसार बाल मज़दूरी महज एक बीमारी नहीं है, बल्कि कई बीमारियों की जड़ है। इसके कारण कई जिंदगियां तबाह होती हैं। सत्यार्थी जब रास्ते में आते-जाते बच्चों को काम करता देखते तो उन्हें बेचैनी होने लगती थी। तब उन्होने नौकरी छोड़ दी और 1980 में “बचपन बचाओ आंदोलन” की नींव रखी। 

चिल्ड्रेन फाउंडेशन 

कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन फाउंडेशन (केएससीएफ) की स्थापना 2004 में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के नेतृत्व में एक ऐसी दुनिया बनाने के लिए की गई थी जो एक बच्चे के लिए रहने लायक हो। एक ऐसी दुनिया जहां हर बच्चा स्वतंत्र है, सम्मान का जीवन जीता है, स्वास्थ्य और शिक्षा तक उसकी पहुंच है, और उसे या अपनी क्षमता का एहसास करने का अवसर है।

फाउंडेशन का लक्ष्य नवाचारों, अनुसंधान, जागरूकता सृजन, भागीदारी और भागीदारी को बढ़ावा देने के माध्यम से बाल संरक्षण सुनिश्चित करके बच्चों के खिलाफ सभी हिंसा और शोषण को समाप्त करना है।

इस दिशा में, KSCF श्री सत्यार्थी के लगभग चार दशकों के प्रतिबद्ध कार्य को जमीनी स्तर और वैश्विक नीति दोनों स्तरों पर बढ़ा रहा है।

KSCF ने सरकारों, व्यवसायों और समुदायों के बीच अधिक सहयोग बनाने, प्रभावी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों को सुनिश्चित करने, जानकारी और सफल प्रथाओं को बढ़ाने और प्रमुख हितधारकों के साथ साझेदारी बनाने की रणनीति अपनाई है।

KSCF श्री सत्यार्थी द्वारा चलाए गए बड़े आंदोलन का हिस्सा है, जिसमें बचपन बचाओ आंदोलन, बाल आश्रम ट्रस्ट और ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर भी शामिल है।

कैलाश सत्यार्थी से संबंधित ताज़ा खबर

नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने एबीपी न्यूज़ के आइडियाज ऑफ इंडिया समिट 2022 में हिस्सा लिया. उन्होंने ‘द ह्यूमैनिटी इंडेक्स’ विषय पर चर्चा की. कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि, भारत का असली विकास तभी होगा जब सभी को समान शिक्षा मिल पाएगी, साथ ही सबसे आखिरी पंक्ति में खड़े हर बच्चे के चेहरे पर हम मुस्कान लाने का काम करेंगे। Dailiy news in Hindi

देश के हर बच्चे को हो अच्छी शिक्षा का अधिकार 

अगले 25 सालों में भारत को ऐसा क्या करना चाहिए, जिससे भारत को सोने की चिड़िया के रूप में देखा जा सके. इस सवाल के जवाब में कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि, देश का हर बच्चा निर्भय होकर पूरी आजादी के साथ स्कूल के क्लासरूम में हो, वैसे ही उसे शिक्षा मिले जैसे देश के बड़े-बड़े उद्योगपतियों और नेताओं के बच्चों को मिल रही हो. इस आइडिया को मापने के लिए गांधी जी से प्रेरित होकर मेरा एक पैमाना है कि देश के बहुत गरीब इलाके में एक लड़की की कल्पना कीजिए जो गुलामी में पैदा हुई है, जिसके मां-बाप बंधुआ मजदूरी में रहते हैं. जो बच्ची हर तरह के यौन शोषण के लिए ट्रैफिकिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. अगर हम सब लोग उस बच्ची के चेहरे पर आज मुस्कान लाएंगे तो 25 साल बाद भारत दुनिया का महानतम राष्ट्र होगा। 

सपने में होती है बड़ी ताकत

शांति का नोबेल पुरस्कार पाने वाले कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि, ये जो कुछ मैंने कहा है वो मुमकिन है। मैंने जब काम शुरू किया तो ये कोई मुद्दा नहीं था. बाल मजदूरी, चाइल्ड ट्रैफिकिंग जैसे शब्द सुने नहीं जाते थे। हमारे देश में अपना कोई कानून नहीं था. लेकिन इसके बावजूद सपने में बड़ी ताकत होती है। अगर हम इससे जुड़ जाएं तो कुछ भी हासिल कर सकते हैं। भारत समस्याओं के लिए नहीं समाधानों के लिए जाना जाता है. हम सब समाधान हैं। इसके लिए हमारी सरकारों को चाहिए कि वो अपने बजट में बच्चों को प्राथमिकता दें। 40 फीसदी आबादी हमारी 18 साल से नीचे की है. लेकिन उनकी शिक्षा, सुरक्षा और स्वास्थ्य को मिलाकर हमारी जीडीपी का 4 फीसदी से भी कम पैसा खर्च होता है। अगर इस देश में एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित है और गुलामी में जी रहा है तो हमें अपने आप को शीशे में देखना चाहिए और स्वीकार करना चाहिए कि ये बच्चे किसी और के बच्चे नहीं हैं बल्कि ये भारत माता की औलादें हैं. हमें इनका बचपन लौटाना चाहिए। 

कैलाश सत्यार्थी विभिन्न संगठन

बचपन बचाओ आंदोलन की स्थापना कैलाश सत्यार्थी ने 1980 में एक बाल मित्रवत समाज बनाने के लिए एक जन आंदोलन के रूप में की थी, जहां सभी बच्चे बहिष्कार और शोषण से मुक्त हों और मुफ्त शिक्षा प्राप्त करें। आंदोलन ने स्वयं को प्रत्यक्ष हस्तक्षेप, सामुदायिक भागीदारी, भागीदारी और गठबंधन के माध्यम से दासता में बच्चों की पहचान करने, मुक्त करने, पुनर्वास और शिक्षित करने, व्यापार में नैतिकता को बढ़ावा देने, श्रमिकों को संघ बनाने, शिक्षा, तस्करी, जबरन श्रम, नैतिक व्यापार जैसे मुद्दों पर अभियान चलाने में संलग्न किया है। और बच्चों के अनुकूल गांवों का निर्माण करके। 

सत्यार्थी ने शिक्षा के लिए वैश्विक अभियान का गठन किया, और 1999 में इसकी स्थापना पर संगठन का अध्यक्ष बनाया गया। शिक्षा के लिए वैश्विक अभियान गैर-सरकारी संगठनों का एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन है, जो अनुसंधान और वकालत के माध्यम से बच्चों और वयस्क शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है। इसका गठन 1999 में गैर सरकारी संगठनों के बीच एक साझेदारी के रूप में किया गया था, जो इस क्षेत्र में अलग-अलग सक्रिय थे, जिनमें एक्शनएड, ऑक्सफैम, एजुकेशन इंटरनेशनल, ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर और बांग्लादेश, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में राष्ट्रीय संगठन शामिल थे।

सत्यार्थी ने गलीचा बनाने के उद्योग में अवैध बाल श्रम को समाप्त करने के लिए समर्पित गैर-लाभकारी संगठनों का एक नेटवर्क गुडवीव इंटरनेशनल (जिसे पहले रगमार्क के नाम से जाना जाता था) की स्थापना की, जिसने दक्षिण में बाल श्रम के उपयोग के बिना निर्मित आसनों की पहली स्वैच्छिक लेबलिंग, निगरानी और प्रमाणन प्रणाली प्रदान की। एशिया। इस बाद वाले संगठन ने 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक के प्रारंभ में यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका में सामाजिक रूप से जिम्मेदार उपभोक्तावाद और व्यापार के संबंध में वैश्विक निगमों की जवाबदेही से संबंधित मुद्दों के बारे में उपभोक्ता जागरूकता बढ़ाने के इरादे से एक अभियान चलाया। रगमार्क इंटरनेशनल ने प्रमाणन कार्यक्रम को फिर से ब्रांडेड किया और 2009 में गुडवीव लेबल पेश किया। संगठन को गुडवीव इंटरनेशनल के लिए फिर से ब्रांडेड किया गया। आज अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में भारत में उत्पादक देश कार्यालय शामिल हैं, नेपाल और अफगानिस्तान; और यूएस, यूके और जर्मनी में उपभोक्ता देश कार्यक्रम। 

कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन फाउंडेशन, 2004 में सत्यार्थी द्वारा बाल अनुकूल दुनिया प्राप्त करने के लिए स्थापित किया गया था, जो विश्व स्तर पर बच्चों के सामने आने वाले मुद्दों को संबोधित करने के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण के साथ काम करता है। कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन फाउंडेशन (केएससीएफ) एक ऐसी दुनिया की कल्पना करता है जहां हर बच्चा स्वतंत्र, सुरक्षित, स्वस्थ और शिक्षित हो। फाउंडेशन अपने संस्थापक और अध्यक्ष, कैलाश सत्यार्थी के तत्वावधान में सभी बच्चों के अधिकारों को बनाए रखने और उनके खिलाफ हिंसा को समाप्त करने के लिए विश्व स्तर पर काम करता है। फाउंडेशन भारत के साथ-साथ विश्व स्तर पर कानून निर्माताओं के साथ नीति वकालत के हस्तक्षेप में अग्रणी रहा है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप बाल यौन शोषण, बलात् श्रम के लिए बच्चों की तस्करी और बच्चों की स्वतंत्रता, सुरक्षा सुनिश्चित करने के सार्वभौमिक अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कानून तोड़ने वाले हैं। स्वास्थ्य और शिक्षा। फाउंडेशन कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ जुड़ने में भी सक्रिय भूमिका निभाता है और बच्चों से संबंधित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए उन्हें प्रशिक्षण, संवेदीकरण और क्षमता निर्माण में सहायता करता है। फाउंडेशन सक्रिय रूप से कॉरपोरेट्स, जमीनी स्तर के संगठनों/नागरिक समाज जैसे अन्य हितधारकों की क्षमता निर्माण की दिशा में काम करता है ताकि उन्हें बच्चों के अनुकूल दुनिया में योगदान करने के लिए उनकी वास्तविक क्षमता को उजागर करने में मदद मिल सके। युवाओं को दुनिया में सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन के प्रमुख और सबसे महत्वपूर्ण प्रमुख प्रेरकों में से एक के रूप में मान्यता देते हुए, फाउंडेशन सभी बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए इस समूह के साथ प्रभावी ढंग से जुड़ा हुआ है। फाउंडेशन बाल संबंधी कानूनों के कार्यान्वयन की दिशा में सर्वोत्तम प्रथाओं की सिफारिश करने के लिए एक वैश्विक मंच के रूप में भी कार्य करता है।

श्री कैलाश सत्यार्थी वैश्विक सामाजिक-राजनीतिक एजेंडा में बाल शोषण को शामिल करने के लिए प्रसिद्ध हैं। 1998 में उन्होंने बाल श्रम के सबसे बुरे रूपों पर एक अंतर्राष्ट्रीय कानून की मांग के साथ 103 देशों में 80,000 किलोमीटर को कवर करते हुए बाल श्रम के खिलाफ सबसे बड़े नागरिक समाज आंदोलनों में से एक की कल्पना की और नेतृत्व किया। इसने अंततः बाल श्रम के सबसे खराब रूपों पर ILO कन्वेंशन नंबर 182 को अपनाया, जिसे औपचारिक रूप से 1999 में सराहा गया और ILO के इतिहास में सबसे तेज़ अनुसमर्थित सम्मेलन बन गया। 

श्री सत्यार्थी ने बाल श्रम के उन्मूलन और बचाए गए बच्चों को शिक्षा और पुनर्वास सेवाएं प्रदान करने के लिए बाल दासता पर दक्षिण एशियाई गठबंधन की स्थापना की। दक्षिण एशिया में सदस्य भागीदारों की मदद से बच्चे के अधिकारों को बनाए रखने के लिए नीति की वकालत संगठन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू रहा है। Science MCQ

कैलाश सत्यार्थी का भाषण 

किसी कॉलेज के कार्यक्रम में कोई वक्ता 30 मिनट के लिए बोलने को आए लेकिन सवा घंटे बोले, फिर भी श्रोता भाषण जारी रखने की मांग करते रहें। फिर अचानक बिजली चले जाने से हॉल में अंधेरा हो जाए, तो स्टूडेंट्स इसलिए अपने मोबाइल की फ्लैश लाइट झटपट ऑन कर लें कि कहीं वक्ता अपना भाषण समाप्त ना कर दें। 

श्री कैलाश सत्यार्थी माणिकचंद पहाड़े लॉ कॉलेज के कानून के विद्यार्थियों, वकीलों और जजों की एक सभा को संबोधित करने आए थे। जाने-माने वकील स्व. विष्णुपंत वी. अद्वंत की स्मृति में यह कॉलेज लेक्चर सीरीज़ का आयोजन करता है। सत्यार्थी जी इसमें मुख्य अतिथि और वक्ता थे। कॉलेज की ओर से 2015 से ही सत्यार्थी जी के दफ्तर में इसके लिए लगातार अनुरोध भेजा जा रहा था।

उनके दफ्तर में ऐसे तीन लाख से अधिक अनुरोध प्रतीक्षारत हैं लेकिन, चूंकि सत्यार्थी जी का औरंगाबाद प्रवास हो रहा था तो उन्होंने कॉलेज का निमंत्रण स्वीकार लिया। कार्यक्रम के तुरंत बाद सत्यार्थी जी को मुंबई की फ्लाइट पकड़नी थी।

इसलिए उन्होंने कॉलेज को सिर्फ 30 मिनट का समय देने का वादा किया था लेकिन सत्यार्थी जी जब भी अपने भाषण को समापन की ओर ले जाने की कोशिश करते, श्रोतागण और मंच पर बैठे गणमान्य लोग यह कहते हुए थोड़ा वक्त और देने की फरमाइश कर देते कि हमने इस दिन का आठ साल इंतज़ार किया है। श्रोताओं का वक्ता के साथ इस तरह का मनुहार चलता रहा और सत्यार्थीजी करीब सवा घंटे बोलते चले गए।

तभी बिजली चली गई। सत्यार्थी जी को लगा कि यह सही मौका है संबोधन को विराम देने का। उन्होंने मंच पर बैठे लोगों का अभिवादन करके इजाज़त मांगी ही थी कि स्टूडेंट्स ने अपने-अपने मोबाइल की फ्लैश लाइटें जला लीं। फ्लैश लाइटों के माध्यम से स्टूडेंट्स ने बता दिया कि हमारा दिल अभी भरा नहीं।

बिजली नहीं थी तो माइक चल नहीं रहा था। पूरे सभागार में एक स्वतःस्फूर्त शांति (पिन ड्रॉप साइलेंस) छा गई, ताकि आखिरी सीट पर बैठे व्यक्ति तक भी सत्यार्थी जी की आवाज़ पहुंच सके।

पावर जेनरेटर चलने में पांच मिनट का वक्त लग गया। तब तक सत्यार्थी जी फ्लैश लाइट में ही बोलते रहे। जब लाइट आई तो सत्यार्थी जी ने यह कहते हुए अनुमति मांगी कि मुंबई की फ्लाइट छूट जाएगी। वहां भी एक कार्यक्रम है, जहां बहुत से लोग इंतज़ार कर रहे हैं। मैं आपके बीच जल्द ही दोबारा आने की कोशिश करूंगा और बात को यहीं से आगे जारी रखेंगे।

आयोजक गदगद थे। उन्होंने इतना समय देने के लिए लिए सत्यार्थी जी का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज के विद्यार्थियों को जहां 15 मिनट का लेक्चर भी बोझिल लगता है, वहीं कानून के स्टूडेंट्स को एक ऐसे व्यक्ति को सवा घंटे से अधिक सुनने को आतुर देखना और वो भी जो कानून के क्षेत्र से नहीं हैं, एक अभूतपूर्व अनुभव था। वक्ता के उद्बोधन के लिए इतना आकर्षण और ऐसा अनुशासन सभी प्रोफेसरों के लिए विस्मित करने वाला था।

लियो टॉलस्टॉय ने लिखा है कि भाषण एक कला है और अनुभव पर आधारित विचारों की अभिव्यक्ति सबसे गूढ़ कला है, क्योंकि इसमें निपुण व्यक्ति श्रोताओं के दिल में उतरकर उन्हें अपने वश में कर सकता है। 

कैलाश सत्यार्थी के जीवन से प्रेरणा

कैलाश सत्यार्थी ये वो नाम है जिसने हमारे देश के हजारो गरीब बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए बहुत से संघर्षों का सामना किया है और उनके बचपन को सवांरा है. उनके इस कार्य के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से 2014 में सम्मानित भी किया गया है।

मदर टेरेसा के बाद कैलाश सत्यार्थी भारत के वो शख्स हैं जिन्हें “नोबेल शांति पुरस्कार” से नवाज़ा गया है। इनके जीवन से हम सबको दुसरो के लिए भला करने और उनके “बचपन बचाओ आन्दोलन” को आगे बढ़ाने में हम सब उनका साथ देने की प्रेरणा मिलती हैं।

कैलास सत्यार्थी से जुडी रोचक जानकारी

  • कैलाश सत्यार्थी विश्व भर में ख्याति प्राप्त सामाजिक कार्यकर्ता हैं।
  • इनहो देश में भारत का नाम विफल हो गया है।
  • इस बार के शानदार प्रदर्शन और सूक्ष्मताएं शामिल हैं।
  • देश दुनिया का कोई भी बच्चा मजदूर यह लक्ष्य है।
  • यह विश्व भर के वातावरण से संबंधित है। 

कैलास सत्यार्थी का संवाद 

कैलास सत्यार्थी ने अपने सामाजिक वातावरण को 1980 में बाल थाओ को अध्यात्म में रखा। अपलोड करने के लिए अनुरोध करने के बाद, उन्होंने एक बार भी लागू नहीं किया। यह विश्व भर के 144 के 83,000 से अधिक सुंदर हैं। वर्ष 1999 में अंतरराष्ट्रीय श्रम संघटित किया गया था। यह दुनिया भर के लिए भी एक पेशेवर पेशेवर के रूप में है। 

कैलाश सत्याग्रही को विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों के द्वारा प्रसारित किया जाता है जैसे – साल 2014 का आनंद पारितोषिक, वर्ष 2009 में प्रेग्नेंट होने के लिए एफ़्रीका (अफ़्रीका), वर्ष 2008 मे लेंसो कोमिन अन्तर्राष्ट्रीय (स्पेन), साल 2006 में मिलीजन फ़्रीडेन्सम (यूएस)। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कैलाश सत्यार्थी को नोबेल पुरस्कार क्यों मिला?

भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बच्चों के अधिकारों के लिए किये गए कार्य के लिए कैलाश सत्यार्थी को 2014 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। सत्यार्थी ने अपना नोबेल पुरस्कार राष्ट्र को समर्पित कर दिया है।

कैलाश सत्यार्थी का जन्म कहां हुआ?

कैलाश सत्यार्थी का जन्म 11 जनवरी को 1954 को मध्यप्रदेश के विदिशा में हुआ। 

कैलाश सत्यार्थी को नोबेल पुरस्कार कब मिला

2014 में कैलाश सत्यार्थी ने नोबेल शांति पुरस्कार जीता था। 2014 में, कैलाश सत्यार्थी को बच्चों और युवाओं के दमन के खिलाफ उनके संघर्ष और सभी बच्चों के शिक्षा के अधिकार के लिए संयुक्त रूप से मलाला यूसुफजई के साथ नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

बचपन बचाओ आंदोलन की शुरुआत कब हुई थी?

बचपन बचाओ आंदोलन भारत में एक आन्दोलन हैं जो बच्चो के हित और अधिकारों के लिए कार्य करता हैं। वर्ष 1980 में “बचपन बचाओ आंदोलन” की शुरुआत कैलाश सत्यार्थी ने की थी जो अब तक 80 हजार से अधिक मासूमों के जीवन को तबाह होने से बचा चुके हैं।

बचपन बचाओ आंदोलन से कौन जुड़े हैं?

1980 में शुरू, बचपन बचाओ आंदोलन बच्चों की सुरक्षा के लिए भारत का सबसे बड़ा आंदोलन है और व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकारी संस्थाओं और नीति निर्माताओं के साथ काम करता है। कैलाश सत्यार्थी आंदोलन के संस्थापक हैं।

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1 thought on “कैलाश सत्यार्थी का जीवन परिचय । Kailash Satyarthi biography in Hindi”

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