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 संविधान संशोधन 

संविधान संशोधन क्या है 

 किसी भी देश के संविधान में समय एवं आवश्यकता के अनुसार बदलाव या परिवर्तन करना ही, संविधान संशोधन कहलाता है। जैसे – संविधान के बनने के समय संविधान में 7 मौलिक अधिकार थे, लेकिन 44 वें संविधान संशोधन के द्वारा संविधान के मूल अधिकारों की सूची में से संपत्ति के अधिकार को हटाकर मौलिक अधिकारों की संख्या 6 कर दी गई। 

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संविधान संशोधन 

अतः संविधान में बदलाव करने के लिए संविधान संशोधन की प्रक्रिया का अनुसरण किया जाता है। भारतीय संविधान के 22 वें भाग के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन की प्रक्रिया को अपनाया जाता है। 

साधारणत: संविधान में संशोधन करने की प्रक्रिया काफी सरल है। लेकिन कुछ देशों में यह प्रक्रिया काफी जटिल है। भारत के संविधान में संशोधन करने की प्रक्रिया कठोर व  लचीली दोनों प्रकार की है, क्योंकि संविधान के अधिकतर भाग या अनुच्छेद ऐसे हैं जिन्हें संसद द्वारा साधारण बहुमत से संशोधित किया जा सकता है। 

लेकिन संविधान में कुछ भाग ऐसे भी हैं जिनमें संशोधन करना की प्रक्रिया के लिए कम से कम आधे राज्यों के विधान मंडलों के सहमति तथा संसद के प्रत्येक सदन में 2 बटा 3 या दो तिहाई सदस्यों की सहमति की आवश्यकता होती है। 

इस प्रकार सविधान संशोधन के तीन प्रकार है-

  1. साधारण संविधान से होने वाले संविधान संशोधन 
  2. विशेष बहुमत से होने वाले संविधान संशोधन 
  3. विशेष बहुमत तथा कम से कम आधे राज्यों के विधान मंडल द्वारा पारित (साधारण बहुमत)। 

भारतीय संविधान में अब तक किए गए सभी संविधान संशोधन

पहला संविधान संशोधन 1951 ई. – 

इस संविधान संशोधन के माध्यम से स्वतंत्रता, समानता एवं संपत्ति से संबंधित मौलिक अधिकारों को लागू किए जाने संबंधी कुछ व्यवहारिक कठिनाइयों को दूर करने का प्रयास किया गया। भाषण एवं अभिव्यक्ति के मूल अधिकारों पर इसमें उचित प्रतिबंध की व्यवस्था की गई। साथ ही इस संविधान संशोधन द्वारा संविधान में नौवीं अनुसूची को जोड़ा गया, जिसम उल्लेखित कानूनों को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक पुनरावलोकन की शक्तियों के अंतर्गत जांच नहीं की जा सकती।

दूसरा संविधान संशोधन 1952 ई. – 

किस संविधान संशोधन के अंतर्गत 1951 ईस्वी की जनगणना के आधार पर लोकसभा में प्रतिनिधित्व को पुनः व्यवस्थित किया गया था।

तीसरा संविधान संशोधन 1954 ई. –

किस संविधान संशोधन के अंतर्गत सातवीं अनुसूची को समवर्ती सूची की जयंती स्पीच प्रविष्ट के स्थान पर खाद्यान्न फसलों के लिए चारा, कपास जुट आदि को रखा गया। जिसके उत्पादन एवं आपूर्ति (aapurti) को लोकहित में समझने (samjne) पर सरकार (sarkar) को उस पर नियंत्रण लगा सकती है।

चौथा संविधान संशोधन 1955 ई. –

किस संविधान संशोधन के अंतर्गत व्यक्तिगत संपत्ति को लोकहित में राज्य द्वारा हस्त गत किए जाने की स्थिति में न्यायालय इसकी क्षतिपूर्ति के संबंध में जांच नहीं कर सकती।

पांचवा संविधान संशोधन 1955 ई. – 

 संशोधन का उद्देश्य राज्य पुनर्गठन के विषय में विधान मंडलों हेतु समय – सीमा निर्धारित करना था। इस अधिनियम के तहत संविधान के अनुच्छेद 3 में संशोधन किया गया। 

अतः इस संविधान संशोधन द्वारा यह व्यवस्था की गई कि राष्ट्रपति विधेयक को जब राज्य विधानमडल

का मत जानने के लिए भेजेगा, तो उसमें समय – सीमा का निर्धारण भी उल्लेखित होगा। 

छठा संविधान संशोधन-

इस संविधान संशोधन द्वारा सातवीं अनुसूची के संघ सूची में परिवर्तन पर अंतरराज्यीय बिक्री कर के अंतर्गत कुछ वस्तुओं पर केंद्र को कर लगाने का अधिकार दिया गया था। 

सातवाँ संविधान संशोधन 1956

इस सविधान संसोधन द्वारा भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन किया गया जिसमें पहले के तीन श्रेणियों में राज्यों के वर्गीकरण को समाप्त करते हुए राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया। साथ ही इनके अनुरूप केंद्र एवं राज्य की विधान पालिकाओं में सीटों को पुनरीक्षित किया गया। 

आठवां संविधान संशोधन 1959 – 

इसके अंतर्गत केंद्र एवं राज्यों के नियमन सदनों में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति एवं आंगनबाड़ी समुदायों के आरक्षण संबंधी प्रावधानों को 10 वर्षों के लिए अर्थात 1971 ईस्वी तक बढ़ा दिया गया। 

नौवां सविधान संसोधन 1960 – 

संविधान संशोधन द्वारा संविधान की प्रथम अनुसूची में परिवर्तन करके भारत और पाकिस्तान के बीच 1958 की संधि की शर्तों के अनुसार बेरुबारी, खुलना आदि क्षेत्र पाकिस्तान को दे दिये गये। 

दशवां संविधान संशोधन 1961 – 

इस संविधान के अंतर्गत भूतपूर्व पुर्तगाली अंत क्षेत्रों दादरा एवं नागर हवेली को भारत में शामिल कर उन्हें केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया। 

ग्यारहवां संविधान संशोधन 1961 – 

इस संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति के निर्वाचन के प्रावधानों में परिवर्तन कर इस संदर्भ में दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को बुलाया गया। साथ ही यह भी निर्धारित किया गया कि निर्वाचन मंडल में पद की अध्यक्षता के आधार पर राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन को चुनौती नहीं दी जा सकती। 

12 वां संविधान संशोधन (1962) – 

संविधान (samvidhan) के अंतर्गत संविधान (संविधान के प्रथम अनुसूची में संशोधन करें गोवा (gova) दमन एवं दीव को भारत (bharat) में केंद्र शासित प्रदेश के रूप में शामिल कर दिया गया। 

13 संविधान संशोधन (1962) – 

इस विधेयक के तहत नागालैंड (nagalend) के संबंध में विशेष प्रावधान (pravdhan) अपना कर (kar) उसे एक राज्य (rajya) का दर्जा दे दिया गया। 

14 संविधान संशोधन (1963) – 

इस संविधान संशोधन के अंतर्गत केंद्र शासित प्रदेश के रूप में पुडुचेरी को भारत में शामिल किया गया साथ ही इसके द्वारा हिमाचल प्रदेश मणिपुर त्रिपुरा गोवा दमन एवं दीव तथा पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेशों में विधान पालिका एवं मंत्री परिषद की स्थापना की गई। 

15 वा संविधान संशोधन (1963) – 

इसके अंतर्गत उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई तथा अवकाश प्राप्त न्यायाधीश क्योंकि उच्च न्यायालय में नियुक्ति से संबंधी प्रावधान बनाए गए।

18 वां संविधान संशोधन (1966) – 

इस संविधान के अंतर्गत पंजाब का भाषाई आधार पर पुनर्गठन करते हुए पंजाबी भाषी क्षेत्र को पंजाब एवं हिंदी भाषी क्षेत्र को हरियाणा के रूप में गठित किया गया। पर्वतीय क्षेत्र हिमाचल प्रदेश को दे दिए गए, तथा चंडीगढ़ को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। 

19 वां संविधान संशोधन (1966) – 

इस संविधान (samvidhan) के अंतर्गत चुनाव आयोग के अधिकारों (adhikaro) में परिवर्तन किया गया, एवं उच्च (uccha) न्यायालयों को चुनाव याचिकाएं (yachikai) सुनने का अधिकार दिया गया। 

21 वां संविधान  संशोधन 1967

इसके द्वारा हिंदी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची के अंतर्गत अंग्रेजी भाषा के रूप में शामिल किया गया

23 वां संविधान संशोधन 1969

इस संविधान संशोधन के अंतर्गत विधान पालिकाओं में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के आरक्षण एवं आंगन मे भारतीय समुदाय के लोगों का मनोनयन और 10 वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया। 

24 वां संविधान संशोधन 1969

इस संशोधन के अंतर्गत संसद की स्थिति को स्पष्ट किया गया कि वह संविधान के किसी भी भाग को जिसमें भाग 3 के अंतर्गत आने वाले मूल अधिकार भी है संशोधित कर सकती है। साथ ही यह भी निर्धारित किया गया कि संशोधित धन संबंधी विधेयक जब दोनों सदनों में पारित होकर राष्ट्रपति के समक्ष जाएगा तो इस पर राष्ट्रपति द्वारा सम्मती दिया जाना बाध्यकारी होगा।

34 वा संविधान संशोधन 1974

 इस संविधान संशोधन के अंतर्गत विभिन्न राज्यों द्वारा पारित भी सुधार अधिनियम को नौवीं अनुसूची में प्रवेश देने हेतु उन्हें न्यायालय द्वारा संवैधानिक वैधता के परीक्षण से मुक्त किया गया। 

37 वां संविधान संशोधन 1975 

इस संविधान संशोधन के अंतर्गत आपात स्थिति की घोषणा और राष्ट्रपति राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनिक प्रधानों द्वारा अध्यादेश जारी किए जाने को अविवादित  बनाने हेतु न्यायिक पुनर्विचार से उन्हें मुक्त रखा गया था। 

39 वा संविधान संशोधन 1975

इस संविधान संशोधन के द्वारा राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति प्रधानमंत्री एवं लोकसभा अध्यक्ष के निर्वाचन संबंधी विवादों को न्यायिक परीक्षण से मुक्त कर दिया गया।

44 वा संविधान संशोधन 1978 

इस संविधान संशोधन के अंतर्गत राष्ट्रीय आपात स्थिति लागू करने के लिए आंतरिक अशांति के स्थान पर सैन्य विद्रोह का आधार रखा गया, एवं आपात स्थिति संबंधी अन्य प्रावधानों में परिवर्तन लाया गया जिससे उनका दुरुपयोग न हो। इसके द्वारा संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों के भाग से हटा कर कार्य विधि कानून बना कर कानूनी अधिकारों की श्रेणी में रख दिया गया। लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं की अवधि 6 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दी गई। उच्च न्यायालय को राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन संबंधी विवाद को हल करने की अधिकारिता प्रदान की गई।

50 वा संविधान संशोधन 1984

इस संविधान संशोधन के द्वारा अनुच्छेद 33 में संशोधन कर सैन्य सेवाओं की पूरक सेवाओं में कार्य करने वाले वालों के लिए आवश्यक सूचनाएं एकत्रित करने देश की संपत्ति की रक्षा करने और कानून तथा व्यवस्था से संबंधित दायित्व भी दिए गए। 

52 वा संविधान संशोधन 1985

इस संविधान संसोधन के द्वारा राजनीतिक दल बदल पर अंकुश लगाने का लक्ष्य रखा गया। इसके अंतर्गत संसदीय विधान मंडलों के उन सदस्यों को अयोग्य घोषित कर दिया गया जाएगा जो उसे दल को छोड़ते हैं, जिसके चुनाव चिन्ह पर उन्होंने चुनाव लड़ा था पर यदि किसी दल की संसदीय पार्टी के एक तिहाई सदस्य (sadsay) अलग दल बनाना चाहते हैं, तो उन पर अयोग्यता लागू नहीं होगी। 

53 वा संविधान संशोधन 1986 

इसके अंतर्गत अनुच्छेद 371 में खंड जी छोड़कर मिजोरम को राज्य का दर्जा दिया गया

54 वा संविधान संशोधन 1986

 इस संविधान संसोधन के द्वारा संविधान की दूसरी अनुसूची के बाद डी में संशोधन कर न्यायाधीशों के वेतन में वृद्धि का अधिकार संसद को दिया गया था।

56 वा संविधान संशोधन 1987

इस संविधान संशोधन के अंतर्गत गोवा को एक राज्य का दर्जा दिया गया तथा दमन और दीव इफको केंद्र शासित प्रदेश के रूप में ही रहने दिया गया था

69 वा संविधान संशोधन 1991 

सविधान संसोधन के द्वारा दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र बनाया गया तथा दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र के लिए विधानसभा और मंत्री परिषद का संबंध किया गया।

70 वा संविधान संशोधन 1993 

इस सविधान संसोधन के द्वारा दिल्ली और पुडुचेरी संघ राज्य क्षेत्रों की विधानसभाओं के सदस्यों को राष्ट्रपति के लिए निर्वाचन मंडल में सम्मिलित किया गया था। 

71 वां संविधान संशोधन 1992

आठवीं अनुसूची में कितनी मणिपुरी और नेपाली भाषा को सम्मिलित किया गया।

73 वा संविधान संशोधन 1992 – 93

 इस संविधान में 11वीं अनुसूची जोड़ी गई इसके पंचायती राज संबंधी प्रावधानों को सम्मिलित किया गया है। इस संशोधन के द्वारा संविधान में भाग 9 जोड़ा गया था। इसमें अनुच्छेद 243 और अनुच्छेद 243 (क) से 243 (ण) अनुच्छेद है।

74वां संविधान संशोधन 1993

इस संविधान संशोधन के अंतर्गत संविधान में 12 वीं अनुसूची शामिल की गई, जिसमें नगर पालिका नगर निगम और नगर परिषदों से संबंधित प्रावधान किए गए हैं। इस संशोधन के द्वारा संविधान में भाग 99 का जोड़ा गया इसमें अनुच्छेद 243 से अनुच्छेद 243 य तक के अनुच्छेद है।

76 वा संविधान संशोधन 1994

 इस संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान की नौवीं अनुसूची में संशोधन किया गया था, और तमिलनाडु सरकार द्वारा पारित ही पिछड़े वर्गों के लिए सरकारी नौकरियों में 69% आरक्षण का उपबंध करने वाली अधिनियम को नौवीं अनुसूची में शामिल कर दिया गया था।

78 वा संविधान संशोधन 1995

इस सविधान संशोधन के अंतर्गत नौवीं अनुसूची में विभिन्न राज्यों द्वारा पारित 27 भूमि सुधार विधियों को समाविष्ट किया गया था। इस प्रकार नौवीं अनुसूची में सम्मिलित आदि नियमों की कुल संख्या 284 हो गई थी।

79 वां संविधान संशोधन

 इस संविधान संशोधन के अंतर्गत अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण की अवधि 25 जनवरी 2010 ई. तक के लिए बढ़ा दी गई, इस संशोधन के माध्यम से व्यवस्था की गई थी कि अब राज्यों को प्रत्यक्ष केंद्रीय करों से प्राप्त कुल धनराशि का 29% हिस्सा मिलेगा।

82 वां संविधान संशोधन 2000

इस सविधान संसोधन के द्वारा राज्यों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण से रिक्त स्थानों की भर्ती हेतु प्रोन्नति के मामलों में अनुसूचित जनजातियां एवं अनुसूचित जनजातियों के अभ्यार्थियों के लिए न्यूनतम प्राप्त अंकों में छूट प्रदान करने की अनुमति प्रदान की गई।

83 वा संविधान संशोधन 2000 

इस सविधान संसोधन द्वारा पंचायती राज संस्थाओं में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण का प्रावधान न करने की छूट प्रदान की गई कि अरुणाचल प्रदेश में कोई भी अनुसूचित जाति न होने के कारण उसे यह छूट प्रदान की गई।

84 वा संविधान संशोधन 2001 

इस संविधान संशोधन द्वारा लोकसभा तथा विधानसभाओं की सीटों की संख्या में वर्ष 2026 ई. तक को कोई परिवर्तन नहीं करने का प्रावधान किया गया। 

85 वा संविधान संशोधन 2001

 इस संविधान संशोधन के द्वारा सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जाति जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था की गई। 

86 वा संविधान संशोधन 2002

 इस संविधान अधिनियम द्वारा देश के 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए अनिवार्य एवं नि:शुल्क शिक्षा को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता देने संबंधी प्रावधान किया गया। इसे अनुच्छेद 21 (क) के अंतर्गत सविधान में जोड़ा गया। इस संविधान संशोधन द्वारा संविधान के अनुच्छेद 45 तथा अनुच्छेद 51 (क) में संशोधन किए जाने का प्रावधान है। 

87 वां संविधान संशोधन 2003 

इस सविधान संसोधन द्वारा परिसीमन में जनसंख्या का आधार 1991 ई. की जनगणना के स्थान पर 2001 ई. कर दी गई है। 

89 वां संविधान संशोधन 2003

 इस संविधान संशोधन के द्वारा अनुसूचित जनजाति के लिए प्रथक राष्ट्रीय आयोग की स्थापना की व्यवस्था की गई थी। 

90 वा संविधान संशोधन 2003 

असम विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों और गैर अनुसूचित जनजातियों का प्रतिनिधित्व बरकरार रखते हुए बोडोलैंड, टेरिटोरियल, कौंसिल चित्र गैर जनजाति के लोगों के अधिकारों की सुरक्षा।

91 वां संविधान संशोधन 2003

इस संविधान संशोधन के द्वारा दलबदलू व्यवस्था में संशोधन केवल संपूर्ण दल के विलय को मान्यता केंद्र तथा राज्य में मंत्रिपरिषद के सदस्य संख्या क्रमशः लोकसभा तथा विधानसभा की सदस्य संख्या का 15% होगा (जहां सदन की सदस्य संख्या 40 – 40 है वहां अधिकतम 12 होगी)।

 92 वां सविधान संशोधन 2003 

इस संविधान संसोधन के द्वारा संविधान की आठवीं अनुसूची में बौडो, डोगरी, मैथिली और संथाली भाषाओं का समावेश किया गया।

93 वां संविधान संशोधन 2002 

इस संविधान संशोधन (samvidhan) के द्वारा शिक्षण संस्थानों (sansthano) में अनुसूचित जाति / जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों (vargo) के नागरिकों के दाखिले के लिए सीटों (sito) के आरक्षण की व्यवस्था संविधान (samvidhan ) के अनुच्छेद 15 की धारा 4 के प्रावधानों के तहत की गई थी।

94 संविधान संशोधन 2006

 सविधान संसोधन द्वारा बिहार राज्य को एक जनजाति कल्याण मंत्री नियुक्त करने के उत्तर दायित्व से मुक्त कर दिया गया, तथा इस प्रावधान को झारखंड व छत्तीसगढ़ राज्यों में लागू करने की व्यवस्था की गई। मध्य प्रदेश एवं ओडिशा राज्य में यह प्रावधान पहले से ही लागू था।

95 वा संविधान संशोधन 2009

 इस सविधान संसोधन द्वारा अनुच्छेद 334 में संशोधन कर इसे लोकसभा में अनुसूचित जातियों व अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण एवं आंग्ल भारतीय को मनोनीत करने संबंधी प्रावधानों को 2020 तक के लिए बढ़ा दिया गया।

96 वा संविधान संशोधन 2011 

इस संविधान संशोधन के द्वारा संविधान की आठवीं अनुसूची में उड़िया के स्थान पर ओड़िया लिखा गया।

97 वां संविधान संशोधन अधिनियम 2011 

इस संविधान संशोधन के द्वारा सहकारी समितियों को एक संवैधानिक स्थान एवं आरक्षण प्रदान किया गया। संशोधन द्वारा संविधान में निम्नलिखित तीन बदलाव किए गए थे – 

सहकारी समिति बनाने का अधिकार एक मौलिक अधिकार बन गया (अनुच्छेद 19 ग)। 

राज्य की नीति (niti) में सहकारी समितियों (samitiyo) को बढ़ावा देने का एक नया नीति (niti lनिदेशक सिद्धांत का (samavesh) समावेश (अनुच्छेद 46 ख)

 सहकारी समितियां नाम से एक नया भाग 9 ख संविधान में जोड़ा गया।

98 वां संविधान संशोधन अधिनियम 2012

इस संविधान संशोधन में अनुच्छेद 371 जे शामिल किया गया इसका उद्देश्य कर्नाटक के राज्यपाल को हैदराबाद, कर्नाटक क्षेत्र के विकास हेतु कदम उठाने के लिए सशक्त करना था।

99 वां संविधान संशोधन अधिनियम 2014 

इस संविधान संशोधन के द्वारा राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग की स्थापना की गई।

101 वां संविधान संशोधन 2017

भारतीय संविधान का 101 वां संविधान संशोधन वस्तु एवं सेवा कर (GST) से संबंधित है। यह संविधान संशोधन 1 जुलाई 2017 को लागू हुआ था। इस संविधान संशोधन को लोक सभा द्वारा 8 अगस्त 2016 को तथा राज्यसभा द्वारा 3 अगस्त 2016 को पारित किया गया था।

102 वां संविधान संशोधन

 यह संविधान संशोधन राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (ncbc) को संवैधानिक दर्जा प्रदान करता है। अर्थात इस संविधान संशोधन के द्वारा इस आयोग को कानूनी आयोग बनाया गया था। इसके तहत संविधान में अनुच्छेद 338 क एवं अनुच्छेद 338 ख जोड़ा गया है। वर्ष 2017 में इस संविधान संशोधन को पारित किया गया था।

103 वां संविधान संशोधन 

यह सविधान संसोधन आरक्षण के प्रावधान से संबंधित है इस संशोधन के द्वारा सामान्य वर्ग को शैक्षणिक संस्थानों और नियुक्तियों में 10 % आरक्षण का प्रावधान किया गया। इस संशोधन के तहत संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 में संशोधन किया गया था। इस विधेयक को लोकसभा व राज्यसभा द्वारा 2019 में पारित किया गया था।

104 वां संविधान संशोधन

यह संविधान संशोधन sc व st के सीटों के आरक्षण से संबंधित है। इस संविधान संशोधन के द्वारा लोकसभा और राज्यसभा की विधानसभाओं में sc/st की सीटों के लिए आरक्षण 10 वर्ष बढ़ाकर 25 जनवरी 2030 तक कर दिया गया है। साथ ही इस संविधान संशोधन के द्वारा एंग्लो इंडियन सीटों को समाप्त कर दिया गया है। वर्तमान में लोकसभा में 84 सीटें अनुसूचित जाति हेतु और 47 सीटें अनुसूचित जनजाति हेतु आरक्षित है। संविधान के अनुच्छेद 334 में इनके आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इस संविधान संशोधन विधेयक को संसद द्वारा 2020 में पारित किया गया था। 

💠 RELETED POST

🔹 संविधान के मौलिक अधिकार
🔸 संविधान की प्रमुख अनुसूचियां
🔹 राष्ट्रपति की प्रमुख शक्तियां
🔸 भारतीय संघीय व्यवस्था

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