संविधान की प्रमुख अनुसूचियां । samvidhan ki anusuchiya pdf। SUPER HINDI STUDY

अनुसूचियों को इंग्लिश भाषा में Schedules कहा जाता है। सविधान के परिवर्तन के समय भारतीय संविधान में अनुसूचियों की संख्या 8 थी, लेकिन भारतीय संविधान में संशोधन करने के बाद वर्तमान में अनुसूचियों की संख्या 12 है। 

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अनुसूचियां 

भारतीय संविधान की प्रमुख अनुसूचियां

संविधान की प्रथम अनुसूची

यह भारतीय संविधान की सबसे महत्वपूर्ण अनुसूची है। इस अनुसूची में भारत के सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों का वर्णन किया गया है।  

संविधान के परिवर्तन के समय भारत में 562 रियासतें थी, जिन्हें संविधान लागू होने के बाद राज्यों के रूप में पुनर्गठित किया गया। वर्तमान (अगस्त 2021) में 28 राज्य और 9 केंद्र शासित प्रदेश हैं।

संविधान की द्वितीय अनुसूची

इसमें देश के विभिन्न पदाधिकारियों जैसे राष्ट्रपति, राज्यसभा के सभापति, उपसभापति, राज्यपाल, लोकसभा के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष, विधानसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, विधान परिषद के सभापति एवं उपसभापति, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक आदि के वेतन, भत्ते, पेंशन आदि का उल्लेख किया गया है। विश्व के सभी पदाधिकारियों में भारत के राष्ट्रपति की सैलरी या वेतन सबसे अधिक है।

संविधान की तीसरी अनुसूची

लोकसभा के चुनाव होने के बाद सभी पदाधिकारियों द्वारा ली जाने वाली शपथ (कौन किसे शपथ दिलाएगा) का वर्णन इसी अनुसूची में किया गया है। 

संविधान की चौथी अनुसूची

इसमें सभी राज्यों तथा संघीय (sanghiy) क्षेत्रों के (rajysabha) राज्यसभा में प्रतिनिधित्व का उल्लेख किया गया है। 

अर्थात राज्यसभा में किस राज्य का कितना प्रतिनिधित्व होगा इसका वर्णन इसी अनुसूची में किया गया है।

संविधान की पांचवी अनुसूची

इस अनुसूची में विभिन्न अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (st) के प्रशासन, नियंत्रण और आरक्षण के बारे में उल्लेख किया गया है।

संविधान की छठी अनुसूची

इस अनुसूची में असम मेघालय त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के बारे में विशेष प्रावधान किया गया है।

संविधान की सातवीं अनुसूची

इस अनुसूची (anusuchi ) में केंद्र एवं राज्यों के बीच (bich) शक्तियों के विभाजन के (ke) बारे में वर्णन किया गया है। इसके अंतर्गत तीन सूचियां है – 

संघ सूची, राज्यसूची एवं समवर्ती सूची

1. संघ सूची-

इस सूची में दिए गए विषय पर केंद्र सरकार कानून बनाती है। तथा केंद्र के अंतर्गत आने वाले सभी विषयों पर कानून बनाने का अधिकार केंद्र सरकार को दिया गया है। 

2. राज्य सूची –

इस सूची में दिए गए विषय (subject) पर राज्य सरकार (sarkar) कानून बनाती है। राष्ट्रहित में केंद्र (kendr) सरकार भी कानून बना सकती है। 

3. समवर्ती सूची –

इस सूची के अंतर्गत दिए गए विषय पर केंद्र एवं राज्य दोनों सरकारें कानून बना सकती है। परंतु कानून के विषय सम्मान होने पर या केंद्र सरकार और राज्य सरकार में विवाद होने पर केवल केंद्र सरकार ही कानून बना सकती है। राज्य सरकार द्वारा बनाया गया कानून केंद्र सरकार के कानून बनाने के साथ ही समाप्त हो जाता है। 

संविधान की आठवीं अनुसूची

इस अनुसूची में भारत की 22 भाषाओं का उल्लेख किया गया है। मूल रूप से आठवीं अनुसूची में 14 भाषाएं थी। 1967 ईस्वी (21 वें संविधान संशोधन) में सिंधी को, 1993 ईस्वी (91 से विधान क्षेत्र वे संविधान संशोधन) में कोकणी, मणिपुरी तथा नेपाली को और 2003 ईस्वी (8 वें में संविधान संशोधन) में मैथिली, संथाली, डोगरी एवं बोडो को आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया।

संविधान की नौवीं अनुसूची

संविधान में यह अनुसूची प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम 1951 ईस्वी के द्वारा जोड़ी गई है इसके अंतर्गत राज्य द्वारा संपत्ति के अधिग्रहण की विधियों का उल्लेख किया गया है इस अनुसूची में सम्मिलित विषयों को न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती वर्तमान में इस अनुसूची में 284 अधिनियम है।

संविधान की दसवीं अनुसूची

यह संविधान (samvidhan) में 52 वें संविधान संशोधन (sansodhan) 1985 ईस्वी के द्वारा जोड़ी (jodi) गई है इसमें दल – बदल से संबंधित (sambandhit प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।

संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची

यह अनुसूची सविधान में चित्र व संविधान संशोधन 1993 के द्वारा जोड़ी गई है। इस में पंचायती राज संस्थाओं को कार्य करने के लिए 29 विषय प्रदान किए गए हैं।

संविधान की बारहवीं अनुसूची

यह अनुसूची संविधान में छात्र विश्व विधान संसोधन 1993 के द्वारा जोड़ी गई है इसमें शायरी क्षेत्र की स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को कार्य करने के लिए 18 विषय प्रदान की गई है।

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