विश्व साइकिल दिवस 2022:

साइकिल चलाना और सीखना हर व्यक्ति की बचपन की सबसे प्यारी और यादगार यादों में से एक है।

दुनिया में, साइकिल अभी भी परिवहन का मुख्य साधन है, और साइकिल चलाना आज भी भारत में भी काफी लोकप्रिय है।

दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा साइकिल उद्योग भारत है और दुनिया में साइकिल उपभोक्ता में भारत का तीसरा नाम आता है।

विश्व साइकिल दिवस

साइकिल की सवारी करने के कई फायदे हैं, जिसमें यह तथ्य भी शामिल है कि वे सस्ती और पर्यावरण के अनुकूल हैं।

इसकी विशिष्टता के कारण, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अप्रैल 2018 में, 3 जून को विश्व साइकिल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।

यह दिन साइकिल को मानव प्रगति, स्थिरता और सामाजिक समावेश के प्रतीक के रूप में और शांति की संस्कृति को बढ़ावा देने वाले एक उपकरण के रूप में मनाता है। 

साइकिल दिवस क्यों मनाया जाता है?

भारत सहित सभी देशों में तकनीक के विकास के साथ ही गाड़ियों का उपयोग भी बढ़ने लगा। लेकिन इससे लोगों की दिनचर्या पर गहरा प्रभाव पड़ा है। लोगों ने समय की बचत और सुविधा के लिए साइकिल चलाना कम कर दिया। बाइक, कार आदि को परिवहन का साधन बना लिया। लेकिन साइकिल के उपयोग फायदे और जरूरत के बारे में लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से इस दिन की शुरुआत हुई। स्कूल, कॉलेज, शैक्षणिक संस्थानों, ऑफिस, सोसायटी आदि में साइकिल चलाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए इस दिन की शुरुआत हुई।

साइकिल का इतिहास 

यूरोपीय देशों में साइकिल के इस्तेमाल का विचार 18वीं शताब्दी के दौरान लोगों को आया था लेकिन 1816 में पेरिस में पहली बार साइकिल का आविष्कार किया गया, उस समय साइकिल को हाॅबी हाॅर्स यानी काठ का घोड़ा कहा जाता था। बाद में 1865 में पैर से पैडल घुमाने वाले पहिए का आविष्कार किया। इसे चलाने से बहुत ज्यादा थकावट होने के कारण इसे हाड़तोड़ कहा जाने लगा। वर्ष 1872 में इसे सुंदर रूप दिया गया। लोहे की पतली पट्टी के पहिए लगाए गए। इसे आधुनिक साइकिल कहा गया। आज साइकिल का यही रूप उपलब्ध है।

Leave a Comment

Your email address will not be published.